Tuesday, October 18, 2011

Dedication to Jagjit Singhji

तुम इतना जो मुस्कुराहे हो
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो 

आखों में नमी हसी लबों पर 
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो 

क्या गम है जिसको छुपा रहे हो
तुन इतना जो मुस्कुराहे हो

बन जायेंगे ज़हर पीते पीते 
ये अश्क जो पीते जा रहे हो

जिन ज़ख्मो को वक़्त भर चला रहा है
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो 

क्या गम जिसको छुपा रहे हो 
तुम इतना जो मुस्कुराहे हो

रेखाओं का खेल है मुक़द्दर 
रेखाओ से मात खा रहे हो

क्या गम है जिसको छुपा रहे हो 
तुम इतना जो मुस्कुराहे हो